इंसानियत – जिंदगी की किताब (पन्ना # 308)


हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई – ये सब धर्म के विशेषण व व्यवस्थाये है । लेकिन ऐसे देखा जाये तो सभी इंसानो का एक ही धर्म है , वह है इंसानियत का धर्म ।

जैसे अग्नि का धर्म है जलना , पानी का प्यास बुझाना, फूल का खिलना, कॉटे का गड़ना …. जब हर एक वस्तु का अपना अपना गुणधर्म है तो सोचे की मनुष्य का क्या अपना धर्म है ?,पूछे तो सबका एक ही जवाब मिलेगा वह है इंसानियत का ।

उदाहरण के लिये यदि हम किसी मज़दूर से कोई मज़दूरी करवाते है । यदि हमारे मे इंसानियत होगी तो उसका पसीना सूखने से पहले ही उसकी मज़दूरी अदा कर देंगे ।

 इसी तरह यदि हमारी आमदनी अच्छी है लेकिन स्कूल नही बनवा सकते तो कोई बात नही , इंसानियत के नाते किसी अनाथ बच्चे की पढाई की व्यवस्था तो कर ही सकते है ।ऐसा करने पर हमे स्कूल बनवाने जैसा पुण्य मिलेगा ।

इसलिये यदि हम ईश्वर का सामीप्य चाहते है तो 

इबादत करे इंसानियत की …..

आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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4 Comments Add yours

  1. Beautiful post. Humanity is above all. Loved your post. Keep up the good work.🙂🙂

    Liked by 1 person

  2. Madhusudan says:

    Itne sundar vichar agar ho jaaye to shaayad dard hi naa rahe….bahut badhiya aur satya vichar…

    Liked by 1 person

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