ईर्ष्या – जिंदगी की किताब (पन्ना # 307)

ईर्ष्यालु व्यक्ति कभी भी दूसरो की उन्नति को सहन नही कर पाता है ,वह दूसरो को नुकसान पहुँचाने के चक्कर मे स्वयं को ज्यादा नुकसान पहुँचा देता है ।एक दृष्टांत द्वारा इसे समझा जा सकता है ….. एक सेठ जिसका नाम भोगीराज था । वह ईर्ष्यालु स्वभाव होने के साथ हमेशा अपने फायदे नुकसान के…