धरती(दिल को छूने वाली बात) – जिंदगी की किताब (पन्ना # 306)

“इंसान “ ने पूछा पृथ्वी से “हे पृथ्वी “ तु इतनी क्यूँ कंजूस है ? हम इंसानो से कड़ी मेहनत करवाकर  एडी चोटी का जोर लगवाकर खून पसीना बहाने के बाद ही हम सब को अन्न का सौग़ात देती है  यदि खून पसीना बहाये बिना ही  तु हमे अन्न दे दिया करे  तो तेरा क्या नुकसान…

इंसानियत – जिंदगी की किताब (पन्ना # 305)

Good day to all divine souls … हाथ से फैंका गया पत्थर करीबन सौ फीट की दूरी पर , बंदूक़ से दागी गोली करीबन हजार फ़ीट की दूरी तक  तोप से दागा गया गोला करीबन पॉच हज़ार की दूरी तक पहुँच सकता है  लेकिन किसी भूखे गरीब इंसान को रोटी खिलाना हमे सीधे स्वर्ग तक…