भक्ति -असली या मान पाने के लिये- जिंदगी की किताब (पन्ना # 6)

भक्ति – असली या मान पाने के लिये …
भक्ति दिखावे के लिये करने से कोई लाभ नही होता हैं उसको ह्रदय से एकांत में स्मरण करने से ही हमें लाभ होता है।आज के युग में असली और दिखावे दोनो तरह की भक्ति करने वाले भी लोग है। कई लोग इतनी ऊंची आवाज में जानबूझकर कर प्रार्थना और आरती गाते हैं ताकि लोग यह समझें कि वह भगवान के भक्त हैं और उनका सम्मान करें।कुछ लोग भाव-भिवोर होकर भी ऊँची आवाज़ में भक्ति करते हैं ।ऐसे भक्तों के चेहरे पर तेज़ टपकता हैं।ऐसे भक्तों के सम्पर्क में आने वाले लोगों को उनकी भक्ति का आभास सहज रूप से महसूस होता हैं।भक्ति के सम्बंध मे एक कथा द्वारा इस प्रकार समझ सकते है ….
बहुत समय पहले की बात हैं ।एक व्यक्ति जिसका नाम सूरज था जो लोगों को दिखाने के लिये नियमित मंदिर जाकर भीड में तेज़ आवाज़ में भजन कीर्तन करता तथा जेसे ही भीड़ चली जाती चुप हो जाता था ।सभी लोग उसे ईश्वर का बहुत बड़ा भक्त मानते और मान देते थे । इस कारण सूरज को बहुत मान पाने की खुशी मिलती। वह अपने आप को महान मानने लगा यहाँ तक की मंदिर मे भी जाता तो सबको उपदेश देता कि भगवान की भक्ति कैसे करनी चाहिये ।बढचढ कर बताता लेकिन यह सब दिखावे के लिये बिना भाव से भगवान के सम्मुख खड़े होकर करता ,लेकिन खुद एकांत मे भूले से भी भगवान को याद नही करता। 

इसी तरह कई दिन बीत गये ।कुछ दिनों बाद वहाँ एक महात्मा आये ,जो सिर्फ़ एकांत मे ही भजन कीर्तन करते ,लेकिन भीड़ में चुप रहते । लोग महात्मा से तरह तरह के ज्ञान के प्रश्न पूछकर उसका समाधान पाते लेकिन सूरज कुछ भी न पूछ पाता ,क्यूंकी उसे लगता की लोग समझेंगे की उसे कुछ नही आता और मान देना बंद कर देंगे ।एक दिन सूरज ने एकांत पाकर उस महात्मा को पूछने लगा कि “संत महाराज “आप अकेले मे तो इतना भजन करते ,पर लोगों के सामने चुप क्यूँ हो जाते हैं, भगवान का भजन तो सबके साथ मिलकर ही किया जाता है। वो संत मुस्कुराय् और आँखें बंद कर ली ।सूरज को लगा कि संत महाराज भी मेरी बात से सहमत है। 

एक दिन सूरज ने एक नयी चप्पल खरीदी और मंदिर के बाहर हमेशा की तरह उतार कर अंदर आ गया ।परंतु उसका मन बार बार चप्पल पर जा रहा था कि कहीं कोई चोरी ना कर ले।ये सब देखकर भगवान को बहुत दुख हुआ।उस रात सूरज ने सपने मे देखा की कोई “दिव्य पुरुष “उसी मंदिर के बाहर उसकी चप्पल के पास खड़ा है, तुरंत ही उसकी नींद टूट गयी वो घबराकर बैठ गया।उसने विचार किया की इसका अर्थ किससे पूछा जाए क्यूंकी उसने कभी कोई प्रश्न मान खाने के चक्कर में किसी से पूछा नही ।

बहुत सोच विचार कर उसने सोचा एकांत मे उसी महात्मा से पूछूँगा जो मंदिर आते हैं ।

उस दिन वो मंदिर गया और उसने एकांत पाते ही अपनी बात संत के सामने रखी।उसकी बात सुनते ही संत की आँखो मे आँसू आ गये और वो भाव समाधि मे चले गये। कुछ देर बाद जब उनकी आखें खुली तो उस व्यक्ति ने फिर अपना प्रश्न दोहराया की इस स्वप्न का क्या अर्थ है? 

संत बोले, वो “दिव्य पुरूष”जो तुम्हारी चप्पल के पास खड़े थे,स्वयं प्रभु थे । जिनकी मूर्ति इस मंदिर मे विराजमान है और वो आपको ऐसा करके यही संकेत दे रहे थे कि तुम मंदिर मे रहकर भी मुझे याद नही करते और मैं मंदिर मे होते हुए भी तुम्हारे चप्पल की रखवाली करता हूँ।

ये सुनते ही सूरज की आँखें भीग गयीं उसने महात्मा के चरण पकड़ लिए और बोला महाराज अब मैं समझा कि आप एकांत मे इतने भाव से क्यूँ भजन गाते, क्यूंकी आप हमेशा प्रभु प्रेम मे रहते हैं ।प्रभु भक्ति दिखावे का नही ,भाव का विषय है।कृपया करके मुझे क्षमा कर दें । ये कहकर सूरज भाव विभोर हो कर महात्मा के चरणों में गिर गया, महात्मा ने उसको प्रेम से उठाया और आगे बढ़कर उसे गले से लगा लिया। 

उस दिन सूरज ने भी भीड़ के साथ हमेशा की तरह ज़ोर ज़ोर से भजन किया परंतु अब भजन बहुत भक्ति में डूबकर गा रह था।उसकी आखें बंद थीं और उनसे ख़ुशी के आँसू निकल रहे थे।

   भक्ति का अर्थ…..                                

1.भक्ति का अर्थ है प्रेम और साथ मे ईश्वर के प्रति निष्ठा होना। ईश्वर हम सभी इंसानों के भीतर निवास करता है तथा हम सभी ईश्वर से प्रेम रूपी उत्तम धागे से जुड़े हैं ।

2, सच्चा भक्त बिना अपेक्षा से ईश्वर के समक्ष केवल पूर्ण समर्पण की भावना से भक्ति करता है। 

3. कुछ भक्त लोग जब दुख में या परेशानी में होते हैं तब सहायता के लिए ईश्वर की भक्ति करते हैं ।

4.  कुछ लोग भौतिक प्रदाथो यानि धन, यश, आजीविका, पदोन्नति के लिए प्रार्थना करते हैं। इसका अर्थ ऐसे भक्त “ईश्वर”से कामना पूरी हो जाये,इसके लिये भक्ति करते हैं ,यह भक्ति अहंभाव पूर्ण विचारों वाली भक्ति होगी।

5. भक्त का अर्थ है ईश्वर के प्रति प्रेम मे मिटने को आतुर। 

आपकी आभारी विमला मेहता 

  जय सच्चिदानंद 🙏🙏
लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

 

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2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    bahut hi sundar katha aur utna hi sudar sandesh……nishchit jab insaan bhakti,prem men hota hai tab kis baat ki chinta ya swarth…..jahan swarth wahan kaisi bhakti ya prem……laajwab likha hai.

    Liked by 1 person

    1. बहुत बहुत शुक्रिया आपको पसंद आया और सराहा

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