ईश्वर को ना बॉटो – जिंदगी की किताब (पन्ना # 304)

ईश्वर को ना बॉटो

भगवान कहॉ है ?

जानने के खातिर

 मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे,गिरजाघर

और ना जाने कहॉ कहॉ भटका

जहॉ गया

सबको कहते सुना कि 

भगवान कण कण मे है 

भगवान रग रग मे है ।

लेकिन सभी को देखकर 

मन को कैसे समझाऊँ ?

जो लोग स्वयं मंदिर, मस्जिद, 

गुरूद्वारे,गिरिजाघर मे 

खुदा के बँटवारे किए बैठे है,

कैसे यक़ीन करूँ मै उन पर ?

मेरी प्रार्थना 🙏🙏 है बस इतनी

हे मानव !!

सबका बँटवारा करते करते 

ईश्वर का बँटवारा ना कर 

ईश्वर का बँटवारा ना कर 🙏🙏

आपकी आभारी विमला मेहता  
लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 
जय सच्चिदानंद 🙏🙏

picture taken from google 

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2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    बहुत बढ़िया संदेश लिखा अपने कविता के माध्यम से।काश लोग समझ पाते।

    Liked by 1 person

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