कुछ हट कर ….

कुछ घरेलू उपचार यदि पसंद आये तो जरूर अपनाना ..... पढने के लिये बहुत बहुत शुक्रिया 🙏🙏 आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता 

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मनुष्य भव अत्यन्त दुर्लभ भव – जिंदगी की किताब (पन्ना # 19)

मनुष्य भव अत्यन्त दुर्लभ भव हैं क्योंकि भगवान की वाणी नर्क के जीव सुन नही सकते । तिर्यंच ( पशु पेड़ आदि ) वाले जीव समझ नही सकते । देवगति में पालन नही कर सकते ।केवल मनुष्य भव ही है जिसमे मानव प्रभु की वाणी को सुनकर समझकर आचरण भी कर सकते हैं। मनुष्य भव... Continue Reading →

आओ सैर करे प्रकृति की पाठशाला की – जिंदगी की किताब (पन्ना # 317)

चलो आज सैर करे प्रकृति की पाठशाला की और ऐसी पाठशाला जो कॉलेज, स्कूलों मे नही वरन वनों से उत्पन्न हुई है  जो संस्कारमय बोध का पाठ उपहार स्वरूप प्राप्त करवाती है । जो सुंदरता ही नहीं वरन इंसान के व्यक्तित्व को भी निखारती है। धन्य है वे महापुरूष जो संसार के कौलाहल से हटकर ... Continue Reading →

Quotes # 6

Good day to all divine souls ... Ahankar soda water bottle ki tarah hn Jo dusray ke guno ko humaray ander nahi janay deti Aur humaray guno ko ander se baher nahi aaney deti आपकी आभारी विमला विल्सन मेहता जय सच्चिदानंद 🙏🙏

लफ्ज # (32,33,34)

1. मजबूत होने में मज़ा तब ही है,जब सारी दुनिया कमज़ोर कर देने पर तुली हो । Majbut honay ka maza tab hi hn jab sari dunia kamjoor karney per tuli ho. 2.निराशावादी की जगह हमेशा आशावादी बने रहिये क्योकि आशावादी व्यक्ति को हर मुश्किल मे भी अनेक अवसर दिखाई देते है । Nirasavadi ki... Continue Reading →

जिन्दगी का सफर – जिन्दगी की किताब (पन्ना # 318)

हर कोई महकता गुलाब की ख्वाहि़श जरूर रखता है  गुलाब सभी को पसंद आता है तो कॉटा सभी नापसंद होता है  पर गुलाब के लिये कॉटे से मुलाकात तो करनी पड़ती है  दोनो का संग एक ही डाल पर होता है  फिर भी गुणों मे गुलाब और कॉटे का फासला दिन रात का होता है ... Continue Reading →

करो अन्न देवता का आदर …..पेट की भूख क्या होती हैं ? जिंदगी की किताब (पन्ना # 18)

करो अन्न देवता का आदर …..पेट की भूख क्या होती हैं ? भूख क्या होती है वह किसी भी भूखे व्यक्ति के पास जाकर पूछो ।भूखा पेट इंसान को क्या क्या करा सकता है ऐसे कई अनुभव मैने अपनी जिंदगी मे देखे हैं । भूख से कई दृष्टांत याद आते है । पहला दृष्टांत मुझे... Continue Reading →

सुख- दुख — जिंदगी की किताब (पन्ना # 316)

सुख दुख सिक्के के दो पहलू है  बारी बारी से आते है और चले जाते है !! दिन डूब गया और अंधेरा छा गया  उषा मुस्कराई और उजाला आ गया किसी वक्त दिन तो किसी वक्त रात है  वैसे ही सुख दुख दोनो संग साथ है !!  पतझड़ ऋतु आई , शुष्क रहकर पेड ने... Continue Reading →

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