लफ़्ज़ # जिन्दगी

1.क़ुदरत को नापसंद है सख़्ती ज़बान मे । पैदा हुई न इसलिये हड्डी ज़बान मे ! 2. बिना नम्रता के कही सुना ज्ञान पड़ा  बिना झुकाये कूप मे भर सकता ना घड़ा ! 3. बनी रहे कुटुम्ब मे प्रतिष्ठा , झलके चाल चलन से । ये सब मिल जाने पर निश्चिंत होकर , फिर रमाये…

अवचेतन मन -इच्छाओं का वृक्ष(भाग दो )-जिंदगी की किताब (पन्ना # 19)

अवचेतन मन -इच्छाओं का वृक्ष..भाग दो … आईये पहले मन के विषय मे जान ले । हमारे भीतर दो मन होते है -चेतन मन और अवचेतन मन। चेतन मन यानि वह मस्तिष्क, जो सोचता है और जिसके बारे में हम जागरूप होते है। दूसरी ओर, हमारे भीतर एक अवचेतन मन भी होता है, जो हमें…

अवचेतन मन -इच्छाओं का वृक्ष(भाग एक) – जिंदगी की किताब (पन्ना #18) 

अवचेतन मन -इच्छाओं का वृक्ष….भाग एक …. हमारे भीतर दो मन होते है : – चेतन मन और अवचेतन मन। चेतन मन यानि वह मस्तिष्क, जो सोचता है और जिसके बारे में हम जागरूप होते है। दूसरी ओर, हमारे भीतर एक अवचेतन मन भी होता है, जो हमें दिखाई तो नहीं देता है, लेकिन यह…

जिद -जिंदगी की किताब (पन्ना 294)

ख़ुद को ही जीतना है  ख़ुद को ही हराना है  ना जाने ये कैसी जिद जो सोचती है हर क़दम  क्यॉ भीड़ हूँ मै इस दुनिया की ? मेरे अंदर भी रचता बसता एक ज़माना है उसे ज़ीने व पूरा करने का अफसाना है  आपकी आभारी विमला मेहता  जय सच्चिदानंद 🙏🙏

 जैसा खाओगे अन्न वैसा बनेगा मन – जिंदगी की किताब (पन्ना # 293)

एक संत थे । वह जंगल मे रहते थे । वहॉ उनको आत्मिक सुख की जो भी अनुभूति मिलती वह शहर मे नही मिलती । एक दिन उस शहर का राजा संत के पास जाकर बोले की महात्मन यहॉ आपको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है आप मेरे साथ राजमहल मे चलिये वहॉ आपको…

प्यार के रूप – जिंदगी की किताब (पन्ना # 292)

प्यार शब्द से ही होता न्यारा,सभी को लगता प्यारा  कुछ शब्द प्यार के विषय मे …. प्यार फूलो जैसा है जो मन को खिलखिलाये प्यार ख़ुशबू जैसा है जो जीवन को महकाये प्यार जुगनु जैसा है जो दिलो को टिमटिमाये  प्यार सूरज जैसा है जो जीवन को रोशनाये प्यार चॉद जैसा है जो मन की…

एक पैग़ाम मातृभाषा के नाम – जिंदगी की किताब (पन्ना # 290)

मातृभाषा या राष्ट्रभाषा ….  हिन्दी दिवस की सभी को शुभकामनायें 🇵🇾🌹🌹 हिन्दी हमारी मातृभाषा ,मात्र एक भाषा नहीं वरन हिन्दी है ,मेरे हिन्द की धड़कन । बहुत सालों पहले की बात है जब मॉबाइल या कम्प्यूटर की सुविधा नही थी । बातचीत का ज़रिया पत्र व्यवहार हुआ करता था । उस समय एक व्यक्ति जो…

चिट्ठियाँ – जिंदगी की किताब (पन्ना # 291)

वो भी क्या दिन थे जब हम चिट्ठियों के जरिये  अपनी भावनाओं को स्याही मे डुबोकर व्यक्त किया करते थे । हर शब्दो मे अपनेपन की महक आती थी ,  हालचाल जानने के लिये चिट्ठियाँ का इंतजार रहता था ।  पर आजकल के कॉम्पिटिशन वाले वैज्ञानिक युग मे  व्यस्त जिंदगी होने के साथ मोबाइल ,इंटरनेट…

लफ़्ज़ # जिन्दगी # जागृति

‪सर नही ऊँचा कभी ,रहते सुना अभिमान का ‬ अपने ऊपर ही पड़ता है ,थूका हुआ आसमान का  “यौवन” , “वाणी” ,अरू “समय” “बहता हुआ जल ” एक बार जो जाय खूब कहे इन चारो को ,मुड़कर वापिस ना आय जीवन एक वृक्ष है फ़ानी ,बचपन तने ,शाख जवानी फिर है पतझड़ खुश्क बुढ़ापा ,उसके…

काल चक्र (भाग छ:) — जिंदगी की किताब (पन्ना # 287) 

6. छट्ठा आरा दुषमा – दुषमा काल – शास्त्रों के अनुसार छ: आरे होते है । पॉच आरों के बारे मे आपको जानकारी मिल चुकी है । अभी पॉचवां आरा चल रहा है । इक्कीस हज़ार वर्ष अवधि वाले पॉचवे आरे की समाप्ति के साथ ही दुख वाला छट्ठा आरा प्रारम्भ होता है । इसकी…

काल चक्र (भाग पॉच ) — जिंदगी की किताब (पन्ना # 286)

5. पंचम आरा ….  दुषमा काल  शास्त्रों के अनुसार छ: आरे होते है । चार आरों के बारे मे आपको जानकारी मिल चुकी है । चौथे आरे की समाप्ति पर 21,000 वर्ष की अवधि वाला पॉचवां दुख वाला आरा आरम्भ होता है । अभी कलयुग मे पॉचवां आरा चल रहा है । पाँचवे आरे मे…

अहंकार – जिंदगी की किताब (पन्ना # 289)

Good day to all divine souls … मात्र ईश्वर एक ऐसा अद्भुत कलाकार है  जिसने पूरे विश्व के हर मानव को  अलग अलग रूप से गढ़ा है  लेकिन फिर भी अहंकार नही किया है । तो फिर हम मनुष्यों को किस बात का अहंकार ? यदि हम अहंकार शून्य कर दे तो  ईश्वरीय कृपा अपने…