नाम – जिंदगी की किताब (पन्ना # 298)

मैने रद्दी काग़ज़ों के रूप मे  सड़कों पर उड़ते अनेक नाम देखे है  जो मरने से पहले  नाम की चाह मे  जीवन भर मरते रहे  जिनमें ठेले वाले चना मूँगफली भरते रहे है । आपकी आभारी विमला मेहता  जय सच्चिदानंद 🙏🙏 Advertisements