लफ़्ज़ # जिन्दगी

1.क़ुदरत को नापसंद है सख़्ती ज़बान मे । पैदा हुई न इसलिये हड्डी ज़बान मे ! 2. बिना नम्रता के कही सुना ज्ञान पड़ा  बिना झुकाये कूप मे भर सकता ना घड़ा ! 3. बनी रहे कुटुम्ब मे प्रतिष्ठा , झलके चाल चलन से । ये सब मिल जाने पर निश्चिंत होकर , फिर रमाये…