अवचेतन मन -इच्छाओं का वृक्ष(भाग दो )-जिंदगी की किताब (पन्ना # 19)

अवचेतन मन -इच्छाओं का वृक्ष..भाग दो … आईये पहले मन के विषय मे जान ले । हमारे भीतर दो मन होते है -चेतन मन और अवचेतन मन। चेतन मन यानि वह मस्तिष्क, जो सोचता है और जिसके बारे में हम जागरूप होते है। दूसरी ओर, हमारे भीतर एक अवचेतन मन भी होता है, जो हमें…

अवचेतन मन -इच्छाओं का वृक्ष(भाग एक) – जिंदगी की किताब (पन्ना #18) 

अवचेतन मन -इच्छाओं का वृक्ष….भाग एक …. हमारे भीतर दो मन होते है : – चेतन मन और अवचेतन मन। चेतन मन यानि वह मस्तिष्क, जो सोचता है और जिसके बारे में हम जागरूप होते है। दूसरी ओर, हमारे भीतर एक अवचेतन मन भी होता है, जो हमें दिखाई तो नहीं देता है, लेकिन यह…

जिद -जिंदगी की किताब (पन्ना 294)

ख़ुद को ही जीतना है  ख़ुद को ही हराना है  ना जाने ये कैसी जिद जो सोचती है हर क़दम  क्यॉ भीड़ हूँ मै इस दुनिया की ? मेरे अंदर भी रचता बसता एक ज़माना है उसे ज़ीने व पूरा करने का अफसाना है  आपकी आभारी विमला मेहता  जय सच्चिदानंद 🙏🙏