जैसा खाओगे अन्न वैसा बनेगा मन – जिंदगी की किताब (पन्ना # 293)

एक संत थे । वह जंगल मे रहते थे । वहॉ उनको आत्मिक सुख की जो भी अनुभूति मिलती वह शहर मे नही मिलती । एक दिन उस शहर का राजा संत के पास जाकर बोले की महात्मन यहॉ आपको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है आप मेरे साथ राजमहल मे चलिये वहॉ आपको…

प्यार के रूप – जिंदगी की किताब (पन्ना # 292)

प्यार शब्द से ही होता न्यारा,सभी को लगता प्यारा  कुछ शब्द प्यार के विषय मे …. प्यार फूलो जैसा है जो मन को खिलखिलाये प्यार ख़ुशबू जैसा है जो जीवन को महकाये प्यार जुगनु जैसा है जो दिलो को टिमटिमाये  प्यार सूरज जैसा है जो जीवन को रोशनाये प्यार चॉद जैसा है जो मन की…

एक पैग़ाम मातृभाषा के नाम – जिंदगी की किताब (पन्ना # 290)

मातृभाषा या राष्ट्रभाषा ….  हिन्दी दिवस की सभी को शुभकामनायें 🇵🇾🌹🌹 हिन्दी हमारी मातृभाषा ,मात्र एक भाषा नहीं वरन हिन्दी है ,मेरे हिन्द की धड़कन । बहुत सालों पहले की बात है जब मॉबाइल या कम्प्यूटर की सुविधा नही थी । बातचीत का ज़रिया पत्र व्यवहार हुआ करता था । उस समय एक व्यक्ति जो…