लफ़्ज़ # जिन्दगी # जागृति

‪सर नही ऊँचा कभी ,रहते सुना अभिमान का ‬ अपने ऊपर ही पड़ता है ,थूका हुआ आसमान का  “यौवन” , “वाणी” ,अरू “समय” “बहता हुआ जल ” एक बार जो जाय खूब कहे इन चारो को ,मुड़कर वापिस ना आय जीवन एक वृक्ष है फ़ानी ,बचपन तने ,शाख जवानी फिर है पतझड़ खुश्क बुढ़ापा ,उसके…