नासमझी का दुख -जिंदगी की किताब (पन्ना # 278)

सोचो तो जगत मे चहुँ और दुख ही दुख कँपायेगा 

पर समझो तो इस दुनिया मे दुख जैसा कुछ भी नही समझ आयेगा 

सारे दुख तो नासमझी के है !!

चाहे जलचर हो या नभचर,या चाहे हो थलचर

सबकी है अपनी कहानी !!

कितने असंख्यात बेबस ,लाचार मूक और निरीह प्राणी

भरे पड़े है इस दुनिया मे,पर मानव जैसा कोई दुखी नही

अकाल होने पर सुना है क्या ,किसी जीव की हाहाकार 

भूख से व्याकुल होकर मरा है क्या,जलधि का कोई जीव 

 दुख से परेशान होते देखा क्या,किसी नभचर को ?

बिना भोजन के सूखकर दुर्बल होकर ,भूख से मरा क्या कोई कौआ ?

ये पंछी तो टकराने से या एक्सीडेंट हो जाने से या पूर्ण आयु से मरा करते है !!

नींद की गोली खाई क्या किसी पशु ने ?
फिर भी सोते कितने मज़े,सुख चैन से ये !!

पर इंसानरूपी दुखो के पुतले 

सुख भरी निद्रा के लिये कितने जतन करते रहते है 

शराब का नशा कर लेते है या नींद की गोली भी खा लेते है !!

लेकिन इस बात मे है सच्चाई

गोली खाओ या पीओ शराब ,दोनो मे है बेहोशी सा नशा 

हम इंसानो की ऐसी फितरत ,समझ के भी नासमझ बन बैठे है 

क़ुदरती नींद तो सचमुच का आनंद है ,प्रकृति का अनमोल तोहफा है !!

डॉक्टर के पास जाते देखा क्या किसी पंछी को ?

बुखार होते सुना क्या,किसी पंछी को ?

कम या ज्यादा बी.पी. हुऑ क्या,किसी पंछी को ?

स्व आदतों से मजबूर इंसान, भयसे भयभीत होकर इंसान दुखो से दुखी होकर इंसान,सभी सुखो से कर लिया ख़ुद को दूर 

इसीलिये बीं.पी.हो या कोई अन्य बीमारी ,सभी को न्यौता दिया भरपूर !!

 स्कूल,कॉलेज गये क्या,कोई पशु पक्षी ?

सोचना जरा ,इन्हें पाठ पढ़ाने या समझाने को कौन जाता है ?

सीखना है तो सीखो इन चिड़ियो से 

स्कूल गये बिना भी ,तिनके तिनके इकट्ठा कर

कितना सुंदर नीड बनाती है,अपने घर को चहकाती है !!

पैसो की दौड लगाते देखा क्या किसी पशु पक्षी को ?

पैसे इकट्ठा किये बिना भी अपना गुजारा बसेरा कर लेते है !!

आधुनिकता से भरी इस दुनिया मे ,मानव ने किया प्रकृति के विरूद्ध काम,

प्रकृति के साथ किया खिलवाड़ ,तभी तो सुखो की जगह ,दुखो की सज़ा पाई है !!

जन्मजात लोभी इंसान ने करतूतों की ऐसी आदत पाई है

जरूरत से भी ज्यादा ,अनगिनत पैसो की चाहत मे पूरी जिंदगी खर्च कर डाली है !!

पर हम सभी इंसान ,बुद्धिजीवी प्राणी होकर भी इतनी बात ना समझ सके

सहजता से करते हुये नित्य कर्मो के साथ,अगर रखे ईश्वर पर अटूट विश्वास 

तो अपने आप चलता है ये संसार ,प्रभु ने कर दिया उसका सारा इंतजाम !!

देखा जाये तो सब जीवों मे ,इंसान अकेला ही है ऐसा दुखी जीव

जिसे सुख चाहत लिये दर दर भटकना पड़ता है ,

हर बात का तर्जुबा लेने और सीखने के लिये कही जाना पड़ता है !!

पर सचमुच मे हर इंसान को सिर्फ एक ही बात जिंदगी मे जानने की सबसे ज्यादा जरूरत है 

“मै कौन हूँ” स्वयं को पहचानने की 

आत्मा से परमात्मा दशा पाने की 

नर से नारायण होने की 

आपकी आभारी विमला मेहता

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    वाह—वाह। आज आपने कमाल का लिखा है—-
    किस पंक्ति का तारीफ करु शब्दरहित।
    कितने असंख्यात बेबस ,लाचार 

    मूक और निरीह प्राणी

    भरे पड़े है इस दुनिया मे

    पर मानव जैसा कोई दुखी नही

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