नासमझी का दुख -जिंदगी की किताब (पन्ना # 278)

सोचो तो जगत मे चहुँ और दुख ही दुख कँपायेगा  पर समझो तो इस दुनिया मे दुख जैसा कुछ भी नही समझ आयेगा  सारे दुख तो नासमझी के है !! चाहे जलचर हो या नभचर,या चाहे हो थलचर सबकी है अपनी कहानी !! कितने असंख्यात बेबस ,लाचार मूक और निरीह प्राणी भरे पड़े है इस…

जिन्दगी की रेसिपी-जिंदगी की किताब (पन्ना # 277)

Good day to all divine souls … मीठी मुस्कान ,नमकीन ऑसू ,कड़वे घूँट  इन तीनों के स्वाद से मिलकर बनी है जिन्दगी की रेसिपी  कभी कभी गुस्सा आने पर ऑसूओ के साथ  उन सबके के लिये कड़वे घूँट पीना पड़ता है , जिन्हें हम खोना नही चाहते है  आपकी आभारी विमला मेहता जय सच्चिदानंद 🙏🙏