क्या बात है –  जिंदगी की किताब (पन्ना # 275)

जैसा खाओगे अन्न वैसा बनेगा मन जैसा पिओगे पानी वैसी निकलेगी वाणी जैसी होगी दृष्टि वैसी बनेगी सृष्टि  जैसा होगा लक्ष्य वैसा होगा पक्ष आपकी आभारी विमला मेहता  जय सच्चिदानंद 🙏🙏 Advertisements

डर -जिंदगी की किताब (पन्ना # 274)

चाहे जग ज़ाहिर ना हो पर हर इंसान के मन मे किसी न किसी बात का डर जरूर छिपा होता है व उसकी वजह से मन ही मन परेशान भी रहता है ।  उन सब मे से एक सबसे बड़ी परेशानी का कारण है ,वह है निंदा का डर ,समाज का डर ।  वह डरता…