ज्ञान की ज्योति – जिंदगी की किताब (पन्ना # 270)

ज्ञान की ज्योति ज्ञान के दीप ज्ञान की ज्योति तुमने ऐसी जलाई जाग उठी तरूणाई जिन्दगी को महकाई भूल गया जीवन क्या है  क्या यह भी पुलकित होता है क्या यह भी रसमय होता है  अनभिज्ञ बना था इससे भी पाने वाला भी खोता है  भू ने स्नेह व्यथा है गाई तुमने ऐसी ज्योति जलाई…