गुस्सा – जिंदगी की किताब (पन्ना # 238)

Good day to all divine souls …

क्रोध एक ऐसी ज्वाला हैं जो स्वर्ग जैसे घर को भी नरक बनाने की ताकत रखती हैं और हमारे सुन्दर वर्तमान को छीनकर भविष्य को बर्बाद कर देती हैं। गुस्से में व्यक्ति की बुद्धि भ्रष्ट जाती हैं व कोई भी कड़वी व चुभती बात बोल देता, जिसके चलते वर्षों पुराने मधुर रिश्ते पर भी पानी फिर जाता हैं। गुस्सा इंसान की खुशी को छीनकर हँसी खत्म कर देता हैं । क्रोध को जैसे ही जीभ का सहारा मिलता है ,वह आग की तरह सुलग जाता हैं। जिसकी चिनगारियाँ हमारे सारे मन-तन को बैचेन व तनावग्रस्त कर देती है। 
क्रोध आने के कई कारण होते है -क्रोध हमेशा दूसरों की गलतियों पर, अपने से छोटे लोगों पर, ईगो हर्ट होने पर व इच्छाओं के विपरित कार्य होने पर आता हैं । यदि व्यक्ति स्वयं ठोकर खाकर गिर जाए, खुद के हाथों से कोई वस्तु टूट जाए आदि ऐसी अनेक स्वयं की गलतियों होने पर भी वह गुस्सा नहीं करता हैं । इसलिए इंसान को चाहिए की वह दूसरों पर तत्काल गुस्सा करने की बजाय क्रोध को ठंडा होने दे तब तक धीरज और शान्ति को धारण करे।
यदि हमे क्रोध आता है तो तुरंत प्रतिक्रिया करने की बजाय उसे थोड़े समय के लिये टालें, मौन रहे, या उस स्थान से उठकर चले जाये । दूसरे की गलतियो को माफ करना सीखे और स्वयं से गलती हो जाने पर माफी माँग लें। गुस्सा आते ही दो गिलास ठंडा पानी पी ले । दूसरों के गुस्सा हो जाने पर मुस्करा कर बात को पॉज़िटिव दिशा मे मोड़ दे। जो इंसान स्वयं को पानी की तरह शीतल और शान्त रखते हैं, गुस्से की आग उनके समीप आते ही ठंडी होने लगती हैं। 

 आपकी आभारी विमला

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    bilkul sahi kahaa…

    Liked by 1 person

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