सत्संग – जिंदगी की किताब (पन्ना # 237)

Good day to all divine souls …

 सत्संग का महत्व ….

कई लोग के मुँह से सत्संग के मामले यह कहते हुये सुना है प्रवचन सुनकर भी यदि अपने मे सुधार नही आता है या बात समझ में ही नही आती तो सत्संग में बैठ कर क्या करेंगे ।

तो इसके जवाब मे यही बोल सकते है कि पेड़ के नीचे बैठने से यह जरूरी नही है कि उस पर लगे फल तुरंत मिल जाये लेकिन इतना तो निश्चित है कि यदि रोज पेड के नीचे बैठेंगे तो एक दिन फल अवश्य मिलेगा । और यदि किसी कारणवश फल न भी मिला तो पेड की छाया हमको धूप से तो बचायेगी ही ,साथ मे शीतल हवा भी देगी ।

ठीक उसी तरह सत्संग के प्रवचन आरम्भ में भले ही समझ में न आये लेकिन रोज लगातर सुनने से धीरे धीरे इसका प्रभाव अवश्य आने लगेगा । इससे दुर्गुणों का नाश और सदगुणो की वृद्धि होगी और कोई भी गलत काम करने से रोकेगा । सत्संग सुनते ही तन,मन दोनो स्वस्थ और प्रफुल्लित हो जाते है। 

जब भी मुश्किल घड़ी आती है तो सत्संग के वचनो को याद करते ही हिम्मत आ जाती है।हमारे अंदर दया, नम्रता, करुणा….जैसे सदगुणो की वृद्धि होती है। जैसे अाग को जलाये रखने के लिए वायु जरूरी है उसी प्रकार आंतरिक परिणति के लिए सत्संग जरूरी है । 

बस हमारा प्रयास कभी भी नही छुटना चाहिए।

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2 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    karat karat abhyaas se jadimat hot sujaan………jaisi sangat waisi soch…..bahut khub….achchha soch kabhi haarne nahi detaa..jo satsang me mil jaataa ha……

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    1. आपने बात को समझा । धन्यवाद

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