जरूरत हैं -जिंदगी की किताब (पन्ना # 220)

जरूरत है   आज के कलयुग मे  घोर निशा मे शशि चाहिये खेत खेत मे कृषि चाहिये शोषण हिंसा की अांधी से  प्रलय मचा है , ज्ञान प्रकाश फैलाने के लिये  सदगुरू की शरण चाहिये  जय सच्चिदानंद 🙏🙏 Advertisements

मन – जिंदगी की किताब (पन्ना # 219)

Good day to all divine souls … मन अगर मंदिर है तो तन उसका परकोटा  जो शख्स दर्शन किये बिना, तन की देहरी से ही लौट जाये  उसका काम है खोटा … जय सच्चिदानंद 🙏🙏