मेरी पहली पोस्ट …..अक्रम विज्ञान मार्ग (आध्यात्मिक विज्ञान)द्वारा आत्मसाक्षात्कार-आत्मज्ञानी परम पूज्य दादा भगवान…

यह मेरी पहली पोस्ट है ।

सबसे पहले मैं ईश्वर,आध्यात्मिक गुरू ,अपने पूज्नीय बुज़ुर्गों को सभी भव्य आत्माओं ,इष्ट देव,देवियों को वंदन करते हुये लेखन प्रारंभ करती हूँ कि सभी मुझे लिखने की शक्ति दें।🙏🙏

दोस्तो ,अभी जो समय चल रहा हैं,उसमें हर व्यक्ति सिर्फ़ अपनी आजीविकाऔर घरेलू वातावरण में इतना डूबा हैं कि लोग भक्ति और ज्ञान का पाठ तथा बातें अवश्य करते हैं, लेकिन मनन नही करते ।जिसकी वजह से आत्मा की शुद्धि कैसे हो ,वह समझ नही पाता।इंसान चाहे कोई भी धर्म या जाति का हो ,आत्मा का अनुभव सभी कर सकते हैं बस ज़रूरत हैं तो एक सच्चे आध्यात्मिक गुरू की ,जो हमारी आत्मा को जाग्रत करवा सके।जैसे एक जलते दिये से कई दिये जला सकते हैं वैसे ही भूमिका एक आध्यात्मिक गुरू की होती हैं।और बातें करने से पहले मैं अपने आत्मज्ञान अनुभव आप सबसे शेयर करना चाहूँगी 

मेरा अनुभव ……

ऐसे तो मै जैन सम्प्रदाय से हूँ लेकिन मैं सभी धर्मों का आदर करती हूँ । जो भी वार त्यौहार आता ,बड़ी धूमधाम से धार्मिक क्रियायो के साथ मनाती । हर तरह के मंत्र का लाखो बार जाप किया ,चाहे शिव भगवान का हो  या कृष्ण भगवान या माताजी का या जैनों का । इतना ही नही सारे ग्रहों का भी जाप किया ।टी वी पर जो भी धार्मिक प्रोग्राम आता वह देखती ।

इसके साथ ही साथ एस्ट्रोलोजी,हस्तरेखा,वास्तुकला आदि को पढ़ने का तथा सीखने का तथा टी.वी. पर जो भी इनसे सम्बन्धित प्रोग्राम आता,देखने का बहुत शौक़ था।इन सभी शास्त्रों में इतना गहराई से उतर गई कि मुझे इन सबका ज्ञान होने लगा व उससे जुड़ी बाते भी सभी को बताती।
एक दिन मैं टी.वी. चैनल पर कोई धार्मिक प्रोग्राम देख रही थी उसी समय आत्मज्ञानी नीरूमॉ …,आत्मज्ञानी दादा भगवान की कही हुई आत्मज्ञान से सम्बन्धित बातों का ज़िक्र कर रही थी कि कैसे कर्मों का बंधन होता हैं और कैसे उससे छुटकारा पा सकते हैं या क्या करे कि कर्म का बंधन ही न हो।ये सब सुनकर लगा कि मैं ज़िंदगी में यही तो पाना चाहती थी और हर रोज़ यही साईंबाबा से माँगती भी थी और वह मुझे मिल गया। 
मैं जल्दी से जल्दी आत्मज्ञानी से मिलकर आत्मा का ज्ञान लेना चाहती थी ,तुरंत फ़ोन लगाया जानकारी के लिये । तब मालूम चला कि पूज्नीय नीरूमॉ का पॉच साल पहले ही देह-विलय हो चुका हैं जो टी.वी.पर सुना वह उनकी पहले की वीडियो रिकोर्डिंग थी।लेकिन उनके बाद आत्मा का अनुभव आत्मज्ञानी पूज्य दीपकभाई करवा रहे हैं।और जहॉ मैं रहती हूँ वहॉ दो महीने के बाद ही पूज्य दीपकभाई आने वाले हैं ,यह सुनकर मेरे पैर जमीन पर ही नही पड़ रहे थे,इतनी ज़्यादा प्रसन्नता हो रही थी।
आत्माज्ञानी दादा भगवान,पूज्यनीय नीरूमॉ,पूज्यनीय दीपकभाई 🙏🙏

आखिरकार वह दिन आ ही गया जब पूज्नीय दीपकभाई का सत्संग सुना और ज्ञानविधी में आत्माज्ञान प्राप्त किया ।उसी दिन से मन ही मन शुद्ध आत्मा का अनुभव होने लगा और समझ लो कि यह एक तरह से मेरा नया जन्म हुआँ।
उस दिन के बाद धीरे धीरे ज़िंदगी में परिवर्तन होने लगा।मन में हमेशा यही भाव आते कि किसी को भी मन,वचन,काया से किंचितमात्र भी दुख न हो ।

आपका कोई भी गुरू या कोई भी ईष्टदेव हो ,जिसको भी मानते हो उनके प्रति पूर्ण समर्पण की भावना होनी चाहिये ।

दोस्तों, हम अपने पूजा घर में या मंदिर में बैठकर भगवान का भजन-कीर्तन करते हैं या लोगों के साथ मिलकर हम धार्मिक आयोजन करते हैं और समझने लगते हैं कि हम भगवान भक्त हैं।ये सब धारणाएँ सही हैं, पर इसके साथ ही अपने हर अच्छे कर्म के माध्यम से भी भक्ति की जा सकती है और हमारा प्रत्येक अच्छा कर्म भगवान की पूजा बन जाता है। कर्म करना ही भक्ति है। यदि मनुष्य किसी निर्धन,दुर्बल,रूग्ण,असहाय व्यक्ति की सेवा बिना किसी जात-पात अथवा ऊँच-नीच के भेदभाव के यह सोचकर कि उसमें साक्षात शिव हैं,करता हैं ।वही सचमुच शिव की उपासना करता है । 
विश्व के प्राणीमात्र की पहले सेवा करनी चाहिए। यही सच्ची भक्ति का स्वरूप है।भक्ति के साथ विश्वास भी होना चाहिये ।इससे सम्बन्धित एक कथा याद आती हैं। 

एक पुरानी लोक कथा के अनुसार एक किसान ने एक सन्त के पास जाकर कहा कि ‘भगवन मुझ दीन, हीन व बिना पढ़े लिखे पर दया कीजिये और मुझे ईश्वर प्राप्ति का उपाय बताइये।’ सन्त प्रसन्न मुद्रा में थे और उस भोले-भाले देहाती को देखकर बोले कि खेती करना आपका कर्तव्य है। आपके स्वभावानुसार आपके लिए नियत इस कर्म को प्रभु की आज्ञा का पालन मान कर करना चाहिये यद्यपि इस कार्य को वर्षा, शीत व गर्मी आदि में खुले आकाश के नीचे, घोर परिश्रम के साथ करना होता है। इतने पर भी सफलता की कोई गारंटी नहीं, मेघ देवता के आने का इंतज़ार करना पड़ता है। इस प्रकार यह कर्म अनेक तकलीफ़ों से युक्त होते हुये भी इसे न करने की कभी मत सोचना। अपने सहज कर्म को छोड़ने से प्रभु की आज्ञा का उल्लंघन होता है फिर सोचो, कौन सा कर्म ऐसा है जिसमें परेशानियाँ नहीं हैं । मतलब यह है कि प्रभु का आदेश पालना करने की भावना से अपने हिस्से के कर्म को पूर्ण प्रमाणिकता, पक्के विश्वास एवं परम प्रेम के साथ तन, मन, धन, जन से करके परम दयालु प्रभु को सादर समर्पित करते रहना ही प्रभु की प्राप्ति का उपाय है।जिस गाँव में किसान रहता था, उसमें किसी ज्योतिषी ने भविष्यवाणी कर दी थी कि वहाँ पॉच वर्ष तक बारिश होने का योग नहीं है। इस भविष्यवाणी से सारे किसान बहुत परेशान हो गये और अपना कृषि का धन्धा छोड़कर जाने लगे ।उस कृषक ने सोचा कि रोने-चिल्लाने से तो कुछ हाथ लगेगा नहीं, वह सन्त महाराज के उपदेश के अनुसार कार्य करके प्रभु प्राप्ति के लिये प्रयास करने के लिए उत्साहित था। मन में पक्का निश्चय करके अपने हल बैल आदि लेकर खेत पर पहुँच गया और सूखे खेत को ही बीजारोपण के लिए जोत कर तैयार करने लगा। गाँव के लोग उसकी नादानी पर हँसी उडाते ,लेकिन वो तो अपनी धुन का पक्का था। वह विश्वास के साथ आकाश को देखता कि बादल अभी गरजेंगे । और ईश्वर से हाथ जोड़कर प्रॉथना करता रहता।एक दिन उस गाँव पर से आकाश में कुछ बादल जा रहे थे, उन्हें भी उसे व्यर्थ परिश्रम करते देखकर अति आश्चर्य हुआ। कोतूहल वश एक मेघ देवता ने नीचे उतर कर किसान से पूछा इस व्यर्थ के परिश्रम को तुम क्यों कर रहे हो। किसान बोला प्रभु की आज्ञा का पालन कर रहा हूँ मैं अपना काम कर रहा हूँ फल देने वाला ईश्वर है। किसान की बात मेघ देवता को लग गई और उसका विश्वास देखकर सारे के सारे बादल एक साथ गरजकर बरस पड़े ।और मूसलाधार वर्षा होने लगी और देखते ही देखते सारे गाँव की धरती को भिगो दिया। सन्त के उपदेश से किसान का विश्वास और दृढ़ हो गया और सभी कार्य प्रभु की आज्ञा मानकर करने लगा।

किसान की भाँति हर मनुष्य को अपने मन में पक्का निश्चय करके कि ,मुझे प्रभु ने अपने ही लिए बनाया है और उनकी आज्ञा मान कर अपना कर्तव्य करके उसे प्रभु को समर्पित करना चाहिये।
तात्पर्य है कि हम जो कुछ करें, सच्ची नीयत से ईमानदारी के साथ, श्रध्दापूर्वक प्रभु को समर्पणकी भावना से करें ,तो हमारी सारी क्रियाएँ भक्ति बन जायेंगी और यही भक्ति हमें परमात्मा तक पहुँचाने में मदद करेगी।

आप सबकी दीदी विमला

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

यदि कुछ लिखने में ग़लती हो गयी हो तो क्षमायाचना🙏🙏

picture taken from google 

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4 Comments Add yours

  1. Abhijith Padmakumar says:

    बहुत अच्छा पोस्ट !!

    Liked by 1 person

  2. Madhusudan says:

    bahut badhiya dhang se shabdon ko sahejkar likhi gayee sarahniye lekh.bahut khub

    Liked by 1 person

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