मर्यादा…

Good day to all divine souls …….

मर्यादा रखना जिंदगी का बंधन नही है बल्कि व्यवस्थित रूप से जीने की कला है ।

मर्यादा चाहे गृहस्थ की हो या संत की,मालिक की या नौकर की,अधिकारी की हो या कर्मचारी की , नेता की हो या जनता की ,डॉक्टर की हो या मरीज की ,चाहे किसी भी क्षैत्र मे हो,हर व्यक्ति तभी शोभा पाता है जब वह मर्यादाओं मे जीता है ।

अगर हमारा जीवन निरंकुश,अमर्यादित ,असंयमी व अविवेक से परिपूर्ण है तो हम दूसरो से कैसे जीत सकते है ।

जब जब हम अपनी मर्यादाओं से बाहर गये है ,तब जो कार्य नही करना था वही किया ।

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4 Comments Add yours

  1. Madhusudan says:

    बिल्कुल सही लिखा आपने—👌👌👌👌

    Liked by 1 person

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