सोच किसान के बारे मे …..

सोच किसान के बारे मे …..

तन झुलस जाता है 

सिर गर्मा जाता है

हाथ खुरदरे हो जाते है 

तलवों मे फफोले पड जाते है 

कपड़े चिथड़े हो जाते है 

तब जाकर फसल लहलहाती है ,जनाब !!

और लोग बोलते है कि 

किसान के जिस्म से 

पसीने की बू आती है 

मैं तो यह कहता हूँ 

पसीने की नही 

मेहनत की बू आती है 

जो सब मे प्राण ले आती है ।

लिखने मे गलती हो तो क्षमाप्रार्थी 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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5 Comments Add yours

  1. सत्य का यथार्थ रुप में चित्रण…👌👌

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      1. स्वागत है

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  2. Madhusudan says:

    बहुत खूबसूरती से बिल्कुल सही लिखा आपने।

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