विचारणीय या समझने वाली बात…..

सन् 2002 मे डा० अब्दुल कलाम राष्ट्रपति पद के लिये चुनाव लड़ रहे थे, उनके चुनाव का काम-काज भाजपा नेता प्रमोद महाजन देंख रहे थे, क्योकि कलाम साहब को राजनैतिक अनुभव नही था। एक दिन प्रमोद महाजन ने कलाम जी से पूछा कि आपका नामांकन भरना हैं, मै किस दिन दस्तावेज लेकर आपके हस्ताक्षर लेने आऊ? क्या आपका कोई शुभ दिन है? कलाम जी ने कहा- “मै एक वैज्ञानिक हूँ, अतः मै यह जानता हूँ कि ये जितने भी ग्रह-नक्षत्र है, सब अपनी निरन्तर चाल से चल रहे हैं। इनकी चाल मे ना तो कभी परिवर्तन आता है और ना ही अवरोध, अतः कोई भी दिन-समय शुभ और अशुभ नही होता, आप जब भी आना मै हस्ताक्षर कर दूँगा।” ये क्रांतिकारी शब्द हमारे देश के महान वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति डा० कलाम के थे। कलाम साहब ने बिना कोई शुभ-अशुभ समय के हस्ताक्षर किऐ और चुनाव भी जीते।‎ अब आप जरा विचार करो कि हमें शनि की साढ़े साती और मंगल की महादशा से डराया जाता है। पहले कुछ अनिष्ट होने का डर दिखाना फिर कुछ पैसे लेकर उसका निराकरण करना, यह बड़ी ताकतवर अर्थनीति का हिस्सा है। आखिर जिस मंगल और चन्द्रमा तक पहुँचने के लिये सरकार अरबो रूपये खर्च करती है, उसकी चाल को मंत्र मारकर कैसे बदला जा सकता है। आखिर वो कौन सा मंत्र है जिससे शनि और मंगल अपनी चाल और दशा बदल देते है। यह धूर्तनीति है, इस पोंगापंथ से बाहर निकलो और विज्ञानवाद की तरफ चलकर अपने पैसे को बचाओ।
This is not written by me

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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