सच्ची घटना (सेवा भाव)….

सच्ची घटना (सेवा भाव)…. गर्मी का मौसम था । भरी दोपहर मे हमारे घर की कुछ दूरी पर तपती सड़क पर एक बूढ़ी औरत सिर पर कुछ सामान की पोटली उठाये जा रही थी । बुढ़ापा , उस पर झुलसा देने वाली गर्मी एवं दुर्बल शरीर ,इन सबने उस बेचारी को थका दिया वह पसीने…

Good day to all divine souls……

मन में कुछ ‘भरकर’ जीयेंगे तो मन भरकर जी नहीं पायेगें ​ If someone speaks to you with anger,pour the soothing waters of  love ❤️ on the fire.  scenery picture taken from google