मन का आईना …. 

देखा जाये तो चेहरा पूरे शरीर का कैमरा होता है। इस पर मन के भाव प्रकट हो जाते हैं।और उस वजह से हमारे चेहरे पर या तो मलिनता आती हैं या तेज आता है।इस बात पर एक कथा याद आती हैं जो इस प्रकार हैं …मन का आईना …..
एक नगर में राजा था जिसके पास अपार सम्पति,सोना चॉदी और हीरे जवाहरात थे । दिल का बहुत अच्छा था ।हमेशा लोगो की भलाई के लिये सोचता रहता था ।कोई भी उसके द्वार से खाली हाथ नही लोटता था ।साथ में वह नयी नयी चीजो को बनवाने का शौकीन था ।लेकिन हर शौक पूरा करने के पीछे भी कुछ न कुछ अच्छा राज ही छिपा होता । नगर के सब लोग राजा से बहुत प्रसन्न रहते । हर प्रकार से , खुश मन से राजा का सहयोग करते।
एक दिन राजा को न जाने क्या दिमाग मे आया कि तुरंत नगर के प्रसिद्ध कारीगरों को राजमहल मे बुलाया और बोला कि मुझे कॉच का महल तैयार करके दो जिसमें हर और कॉच ही कॉच लगे हो ,इंसान अपनी सूरत को अच्छे से देख सके ।सामान और लागत कितना भी लगे ,उसकी चिंता मत करना लेकिन मुझे हर हाल में ऐसा कॉच का महल चाहिये ।
सब कारीगर राजा की आज्ञा मानकर महल को बनाने मे रात दिन जुट गये । आखिरकार जल्दी ही कॉच का महल तैयार हो गया । महल की हर एक दीवार पर सैकड़ों कॉच जड़े हुए थे। राजा महल को देखकर बहुत खुश हुये और कारीगरों को ढेर सारा ईनाम दिया ।उस महल को सार्वजनिक कर दिया गया । दूर दूर से लोग महल को देखने आते और महल की सराहना करते न थकते ।
एक दिन एक बहुत गुस्सैल इंसान महल को देखने गया। जैसे ही वह इंसान उस कॉच महल के अन्दर घुसा, वहां कॉच की वजह से उसे सैकड़ों गुस्सैल इंसान दिखने लगे। सारे के सारे उसी गुस्सैल इंसान की तरह क्रोधी और चिंतित ,दुखी लग रहे थे। उनके चेहरे पर आ रहे क्रोध के तरह तरह के भावों को देखकर वह इंसान और ज्यादा क्रोधित हुआ और उन पर जोर जोर से चिल्लाने लगा। जैसे जैसे कह चिल्लाता ,उसी वक्त उसे वह सैकड़ों इंसान भी अपने ऊपर क्रोध से चिल्लाते हुए दिखने लगते । 
इतने सारे लोगों को खुद पर चिल्लाते देख वह डरकर वहां से भाग गया। कुछ दूर जाकर उसने मन ही मन सोचा कि ये कितनी बुरी जगह हैं ,इससे बुरी कोई और जगह नहीं हो सकती ।इसको उसने अपनी जिंदगी का सबसे बुरा अनुभव माना ।
कुछ दिनों बाद एक अन्य इंसान आया जो एकदम शांत स्वभाव था ।प्रेम एवं करूणा से झलकता हुआ उसका तेजस्वी चेहरा सबको मोह लेने वाला था ।वह व्यक्ति सब लोगो को दोनो हाथ जोड़ते हुये कॉच के महल मे पहुंचा। स्वभाव से व देखने में एकदम खुशमिजाज और जिंदादिल था। 
महल में घुसते ही उसे वहां बहुत ही सुंदर दृश्य देखने को मिले उसे सैकड़ों इंसान हाथ जोड़कर उसका स्वागत करते दिखे।ये देखकर उसका मन बहुत उत्साह से भर गया । उसने खुश होकर सामने देखा तो उसे सैकड़ों इंसान खुशी एवं आनंद मनाते हुए नजर आए। यह सब देखकर वह आनंद से झूम उठा जब वह महल से बाहर आया तो उसने महल को दुनिया का सुंदर स्थान और वहां के अनुभव को अपने जीवन का सबसे बढ़िया अनुभव माना। 
दोस्तों इस कहानी के पीछे बहुत बड़ा मकसद छुपा है । हर इंसान के अंदर और बाहर का संसार भी ऐसा ही कॉच का महल है,जिसमें व्यक्ति अपनी सोच एवं विचारों के हिसाब से ही क्रिया व प्रतिक्रिया देता है। जो लोग इस संसार मे आनंद उठाते हुये जिंदगी जीते हैं वे यहां से हर प्रकार के सुख और आनंद के अनुभव लेकर जाते हैं ।चाहे परिस्थितिया कैसी भी ।जो लोग इस संसार को दुःखों का घर समझते हैं उनकी झोली में दुःख और कडवाहट के सिवाय कुछ नहीं आता । 
इसलिए हमें किसी भी इंसान को अपने सुख या दुख का जिम्मेदार नही ठहराना चाहिये । हम स्वयं ही अपने मित्र या शत्रु हैं ।
कोई भी इस जगत मे नही है जिसका मन नही भटकता हो या जो सुख दुख से दूर हो ? मानव का मन इतना चंचल होता है कि पल में यहां और पल में वहां चला जाता है। हमारे मन के भाव ,विचार ही जीवन में अच्छी राह प्रदान करते है ।इन विचारों से पूरा मानव शरीर प्रभावित हो सकता हैं । उदाहरण के लिये बीमारी का इलाज करते समय कई बार ऐसी दवा का प्रयोग किया जाता है जो दर्द का अहसास नही होने देती, क्योकि नर्वस सिस्टम को बंद कर दिया जाता हैं जिससे मस्तिष्क तक सूचनाये नही पहुँचती हैं । इसी प्रकार मन का भी यही हाल है जब हम मन की भावनाये मस्तिष्क को पहुँचाते है तो फिर सुख और दुख उत्पन्न होते हैं ।इसलिये हमेशा मन की भावनायें शुद्ध व पवित्र रखे । खुद भी खुश रहे औरों को भी खुश रखे !!

picture taken from google 
      लिखने मे गलती हो गई हो तो क्षमाप्राथी 🙏🙏
               जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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