आत्मा का परमात्मा से वार्तालाप …..

आत्मा का परमात्मा से वार्तालाप …..
दिनभर के सारे कामकाज करके मन मे ये सोचकर कि चलो आज के सब कार्य पूर्ण हो गये ,कुछ भी बाकी नही रहा ,अब निश्चिंत होकर सो जाती हूँ और सो गई ।लेकिन सोते ही ऐसे लगा कि कोई दिव्य पुरूष मुझसे कुछ पूछ रहा हैं कि वाकई में तुमने सारे ज़रूरियात कार्य पूरे कर लिये है ? कुछ भूल तो नही रही हो । मैं बोली,हॉ !!सभी पूरे हो गये कुछ भी नही भूली 

वह बोले कि सही कह रही हो तुम ,कुछ भी नही भूली हो !!सिवाय मेरे । 

मालूम है ,कल सुबह तुम जैसे ही सो कर उठी ,मैं तुम्हारे पास ही खड़ा था। मुझे लगा कि तुम उठते ही सबसे पहले मुझसे कुछ बात करोगी और आज का दिन मिला उसके लिये धन्यवाद करोगी ।अपनी बेटी की सगाई और अपने पति की नौकरी के प्रमोशन के लिये मुझे धन्यवाद कहोगी ,लेकिन ये क्या ?तुम तो फटाफट उठकर ब्रश करके सबके लिये दूध,चाय ,नाश्ता व टिफ़िन तैयार करने के लिये रसोईघर मे चली गई । मैने सोचा कि बच्चो के स्कूल व पति के ऑफ़िस जाने के बाद तुम मेरे लिये कुछ वक्त निकालोगी । वक्त निकालना तो दूर मेरी तरफ देखा भी नहीं । 

पति व बच्चो के जाते ही काम वाली बाई आ गई ।उसको काम बताकर तुम ऑफ़िस जाने की तैयारी करने लग गई ।सोचा तुम तैयार होकर मुझसे बात करोगी और शायद अब तुम्हारा ध्यान मुझ पर आयेगा,लेकिन ऐसा नहीं हुआ। तुम तैयार होते ही सीधा आफिस जाने के लिए बस पकड़ी । मैंने समझा कि बस मे खाली समय का उपयोग तुम मुझसे बातचीत करने में खर्च करोगी पर तुम तो मोबाइल पर अपने मित्रों से बातचीत मे व्यस्त हो गई और मैं तुम्हारा इंतजार करता रहा ।

मैं तो तुम्हें सिर्फ यही कहना चाहता था कि पूरे दिन मे कुछ पल ही सही मेरे साथ बिताकर तो देखो । तुम्हारे सारे काम और भी अासानी से होने लगेंगे । तुम्हें दुख का अनुभव ही नही होगा बल्कि अद्भुत आनंद प्राप्त होगा ।

लेकिन तुमनें मुझसे बात करने की आवश्यकता भी नही समझी । बाद मे एक मौका ऐसा भी आया जब तुम लंच के बाद बिलकुल खाली थी और कुर्सी पर पूरा आधा घंटा यूं ही बैठी सुस्ता रही थी लेकिन तब भी तुम्हें मेरा ध्यान नहीं आया।

शाम को टी टाईम के वक्त जब तुम इधर उधर देख रही थी तो भी मुझे लगा कि तुम एक पल के लिये मेरे बारे में सोचोंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

दिन का अब भी काफी समय बचा था। मुझे लगा कि शायद इस बचे हुये समय में हमारी बात हो जायेगी,लेकिन घर पहुँचने के बाद तुम रोज़मर्रा के कार्यो में व्यस्त हो गयी ।जब डिनर व सारे काम निबट गये तो परिवार के सब सदस्य आपस मे गॉसिप करने मे लग गये । बाद मे बच्चे पढने चले गये ।पति और तुम टीवी और मोबाइल खोल कर बैठ गये ।

जब तुम्हें थकान महसूस होने लगी तो तुमनें अपनी पति ,बच्चों को गुड नाइट कहा और चुपचाप चादर ओढ़कर सो गई ।मेरा बड़ा मन था कि मैं भी तुम्हारे साथ कुछ वक्त बिताऊँ । तुम्हारी कुछ सुनूं और तुम्हे कुछ मार्गदर्शन करूँ कि ताकि तुम्हें समझ आए कि तुम्हारा इस धरती पर आने का क्या मक़सद है । तुम्हें बता सकूँ कि ये सारे कार्य तो ताउम्र चलते रहेंगे और क़ुदरत उसको पूरा करने मे सहयोग भी देती रहेगी । लेकिन इनके साथ जो सबसे महत्वपूर्ण ,जो ख़ुद के करने का पुरुषार्थ है वह परम पिता परमेश्वर की भक्ति मे लीन होना या उसकी भजना करना । 

यहॉ आकर तुम तो इतने कामों में उलझ गयी हो कि तुम्हें मेरे से बात करने का समय ही नहीं मिला । फिर भी तुम्हारे प्रति मेरा प्रेम कभी कम नही होगा ।जब भी याद करोगी तुम्हारे पास  दौड़ा आऊँगा ।

हर रोज़ मैं इस बात का इंतज़ार करता हूँ कि तुम मुझे याद करोगी और अपनी सुख की बाते करोगी और सबके लिए मेरा धन्यवाद करोगी । लेकिन तुम मेरे पास तब ही आती जब तुम्हें कुछ चाहिए । तुम जल्दी जल्दी ढेर सारी अपनी माँगें मेरे आगे रख देती वो भी मेरी तरफ देखे बिना । उस समय भी तुम्हारा ध्यान कही और ही लगा रहता है, बड़ी करूणा आती है तुम पर ।
खैर कोई बात नहीं । एक ना एक दिन तुम मुझे जरूर याद करोगी व तुम्हें मेरे प्रति आस्था हो जायेगी ऐसा मुझे विश्वास है।आखिरकार मेरा दूसरा नाम…आस्था और विश्वास ही तो है।

इसी बातचीत मे अचानक मेरी ऑंखें खुल गई लेकिन परमात्मा से हुई बातचीत अभी भी दिमाग़ मे गूँज रही थी ।

बात भी सही थी कि आजकल के भागदौड़ वाले ज़माने मे हम इस कदर उलझ गये की बह्रमांड की सबसे बड़ी शक्ति ईश्वर जो हम सबका ख़्याल रखते है ,हम सबके पालनहार है उनको भी याद करने के लिये हमारे पास समय नही है।

चाहे कुछ भी हो यदि हम परमात्मा के साथ जुड़ने का रोज़ दृढ़ निश्चय करे और फ़ालतू कामों मे समय बरबाद न करके उस परम शक्ति की आराधना मे जीवन व्यतीत करने का मक़सद बना ले तो जरूर हमारा मनुष्य जीवन सार्थक हो जायेगा।

लिखने मे गलती हो तो क्षमायाचना 🙏🙏

जय सच्चिदानंद 🙏🙏

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4 Comments Add yours

  1. Jagdish Jat says:

    वक्त क्यों आखिर नही मिला, वक्त मिला तो सोचेंगे 🙂

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    1. धन्यवाद
      वक्त निकालने के लिये सोचना नही चाहिये

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