गुस्से के कुछ क्षण -जिंदगी की किताब (पन्ना # 13)

गुस्से के कुछ क्षण…..
लोगों को गुस्सा क्यों आता है, इसकी कई वजह होती हैं , वजह चाहे जो भी हो, गुस्सा दिलाने पर लोग खुद को काबू में नहीं रख पाते और भड़क उठते हैं।कई बातें एक इंसान को गुस्सा दिला सकती हैं, जैसे जब उसके साथ नाइंसाफी होती है या उसकी सबके सामने बेइज्जती की जाती है ।अलग-अलग लोगों को अलग-अलग वजह से गुस्सा आता है ।कभी कभी उसे लगता है कि कोई उसका अधिकार छीनने की कोशिश कर रहा है या उसके नाम पर धब्बा लगा रहा है।
इंसान चाहे वह आदमी है या औरत,गुस्सा दिलाए जाने पर अलग-अलग तरीके से पेश आते हैं। कुछ लोगों को कभी कभार ही गुस्सा आता है और वे गुस्सा होते हैं तो जल्द शांत भी हो जाते हैं। जबकि कुछ ऐसे हैं जो ज़रा-ज़रा-सी बात पर गुस्सा कर लेते हैं और यह गुस्सा कई दिनों या कई महीनों यहॉ तक की सालों साल तक अपने अंदर गुस्से की आग को सुलगाए रखते हैं।कई व्यक्ति गुस्से में अपना आपा ही खो बैठते हैं। इसकी एक वजह यह भी आज हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ लोगों को सिर्फ अपनी पड़ी रहती है। जब कुछ लोग अपने मन की नहीं चला पाते, तो वे अकसर गुस्से मे तमतमा उठते हैं। स्वार्थ के अलावा, और भी कई वजह हैं जिनसे गुस्सा करने की समस्या बढ़ती जा रही हैं।अगर एक बच्चे की परवरिश ऐसे माहौल में होती है, जहाँ माँ-बाप हमेशा एक-दूसरे से भिड़े रहते हैं और बात-बात पर चिल्लाते हैं, तो बच्चे को यही सीख मिल रही होती है कि स्थिती का सामना करने के लिए गुस्सा करना ज़रूरी है।जो बच्चा ऐसे माहौल में पला-बढ़ा हो जहाँ क्रोध, गुस्सा और चीखना-चिल्लाना आम है, तो लाज़िमी है कि बड़े होने पर वह गुस्सैल स्वभाव का बनेगा।आए दिन तनाव की नयी-नयी वजह उभर रही हैं और लोगों के सब्र का बाँध टूटता जा रहा है। वे आसानी से चिढ़ जाते हैं या गुस्सा हो जाते हैं।आर्थिक व्यवस्था में भारी गिरावट आने से भी लोग तनाव और चिंता से घिरे मिलते हैं जिसकी वजह से गुस्सा आना स्वाभाविक हो जाता हैं ।

जो बच्चे बार बार टी.वी,मीडिया मे भी ऐसे कार्यक्रम देखते हैं जो मारधाड़ वाले होते हैं और असली लगते हैं, तो बड़े होने पर इसका उन पर बहुत बुरा असर होता है। उनके दिमाग में यह बात बैठ जाती है कि गुस्से में आकर किसी पर भी हाथ उठाना गलत नही हैं ।गुस्सा करना कही भी अच्छा नही माना जाता ।कभी कभी गुस्से मे व्यक्ति से कुछ भी अनर्थ होने की संभावना होती हैं कैसे ?पढिये ये कहानी…..

क्रोध के दो मिनट…..

एक समय की बात है एक लड़का जिसका नाम “तेजसिंह”था वह हमेशा अपने पिता के साथ व्यापार करने में हाथ बँटाता था । व्यापार करने मे पिता से भी दो कदम आगे था । शादी लायक होने पर पिता ने तेजसिंह का विवाह एक अत्यंत सुंदर और सुशील लड़की जिसका नाम शीतल था,के साथ कर दी ।एक साल बाद शीतल गर्भवती हो गई ।

 तेजसिंह को शुरू से ही परदेस में जाकर ढेर सारा धन कमाने की इच्छा थी,एक दिन उसने पिता के पास जाकर परदेस मे व्यापार करने की इच्छा जताई । पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती पत्नी को अपने माँ-बाप के भरोसे छोड़कर व्यापार को चला गया ।परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया लेकिन उसको उस धन से संतुष्टि नही थी वह इससे भी ज्यादा धन कमाना चाहता था ऐसा करते करते 18 वर्ष धन कमाने में बीते गए तो सन्तुष्टि हुई और वापस घर लौटने की इच्छा हुई । शीतल को पत्र लिखकर आने की सूचना दी और जहाज में बैठ गया ।उस जहाज में एक व्यक्ति जिसका नाम ज्ञानचंद था मिला वह दुखी मन से बैठा था । तेजसिह ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने बताया कि इस देश में ज्ञानी की कोई इज्जत नही है मैं यहां ज्ञान बाँटने आया था पर कोई ज्ञान की बाते सुनने को तैयार नहीं है ।तेजसिह ने सोचा चलो मैं ही इससे ज्ञान की बाते सुन लेता हूँ बेचारा बहुत दुखी हैं उसको भी अच्छा लगेगा और मुझे भी इतने साल बाद कुछ ज्ञान की अच्छी बात सुनने को मिलेगी ।इस देश में मैने तो बहुत धन कमाया। यह तो मेरी कर्मभूमि है। इसका मान रखना चाहिए । उसने ज्ञान जानने की इच्छा जताई । ज्ञानचंद ने कहा ठीक है पर मेरे हर ज्ञान की कीमत 500 स्वर्ण मुद्राएं है ।तेजसिह को यह महंगा लगा, लेकिन कर्मभूमि का मान रखने के लिए 500 मुद्राएं दे दीं । व्यक्ति ने ज्ञान का सूत्र दिया कि कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट रूककर सोच लेना। सेठ ने सूत्र अपनी किताब में लिख लिया ।

कई दिनों की यात्रा के बाद तेजसिह रात्रि के समय अपने नगर को पहुंचा । उसने सोचा इतने सालों बाद घर लौटा हूँ ,क्यों न चुपके से बिना खबर दिए सीधा शीतल के पास पहुंच कर उसे आश्चर्य का उपहार दूं।वह घर पहुँच गया और घर के द्वारपालों को मौन रहने का इशारा करके सीधे अपने पत्नी शीतल के कक्ष में गया तो वहां का नजारा देखकर उसके पांवों के नीचे की जमीन खिसक गई. पलंग पर उसकी पत्नी के पास एक युवक सोया हुआ था.अत्यंत क्रोध में सोचने लगा कि मैं परदेस में भी इसकी चिंता करता रहा और ये यहां अन्य पुरुष के साथ है।दोनों को जिन्दा नही छोड़ूंगा।क्रोध में आकर तलवार निकाल ली.वह तलवार से वार करने ही जा रहा था कि उतने में ही उसे 500 अशर्फियों से प्राप्त ज्ञान सूत्र याद आया कि कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट सोच लेना । सोचने के लिए रूका और तलवार पीछे खींची तो तलवार एक बर्तन से टकरा गई ।बर्तन गिरा तो शीतल की नींद खुल गई ।जैसे ही उसकी नजर अपने पति पर पड़ी वह ख़ुश हो गई और बोली- आपके बिना सारा जीवन सूना सूना लग रहा था । इन्तजार में इतने वर्ष कैसे निकाले यह मैं ही जानती हूं ।तेजसिंह तो पलंग पर सोए युवक को देखकर गुस्से में था।शीतल ने युवक को उठने के लिए कहा और बोली बेटा जाग. तेरे पिता आए हैं. युवक उठकर जैसे ही पिता को प्रणाम करने झुका माथे की पगड़ी गिर गई ।उसके लम्बे बाल बिखर गए.तेजसिंह को पत्नी शीतल ने कहा “स्वामी ” ये आपकी बेटी है. पिता के बिना इसकी इज्जत को कोई आंच न आए इसलिए मैंने इसे बचपन से ही पुत्र के समान ही पालन पोषण किया और संस्कार दिए हैं।यह सुनकर तेजसिंह की आंखों से आंसू बह निकले ।शीतल और बेटी को गले लगाकर सोचने लगा कि यदि आज मैने उस ज्ञानसूत्र को नहीं अपनाया होता तो जल्दबाजी में कितना अनर्थ हो जाता. मेरे ही हाथों मेरा निर्दोष परिवार खत्म हो जाता। ज्ञान का यह सूत्र उस दिन तो मुझे महंगा लग रहा था लेकिन ऐसे अनमोल सूत्र के लिए तो 500 अशर्फियां भी बहुत कम हैं ।

इस कथा का सार यह हैं कि यदि क्रोध में इंसान दो मिनट भी शान्ति कर ले तो जीवन के ये दो मिनट भी दुःखों से बचाकर सुख की बरसात कर सकते हैं

जब कभी भी हमें या किसी को भी गुस्सा आता है गुस्से वाले इन्सान की आँखे बंद हो जाती हैं और मुंह खुल जाता हैं इसका कारण यह हैं कि कई बार वह सच्चाई को देख नहीं पाता है और कई बार किसी गलत बात पर ज्यादा क्रोधित हो जाता है । ऐसे आध्यात्मिक दृष्टि से सोचा जाये तो एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति पर ग़ुस्सा उसके पूर्व कर्मो के किये गये राग द्वेष के अनुसार होता हैं जिसको समता के साथ रहकर काफी हद तक विजय पा सकते हैं इसके साथ ही अच्छा खानपान गुस्से को खत्म कर सकता है जैसे कि गुस्सा कम करने के लिए आप सेब का सहारा ले सकते हो क्योंकि यह दिमाग की कमजोरी को ठीक करने के साथ ही शक्ति को बढाती।आंवले का मुरब्बा,गुलकंद वाला दुध का आदि से गुस्सा कम हो जाता हैं।जब भी गुस्सा आये तो उसे वही पर काबू करने के लिए 2-3 गिलास के पानी को आप घुट घुट भर पिएं। वो पानी एक दम तनाव को कम करेगा जिससे गुस्सा शान्त हो जायेगा।जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन ,जी हॉ ज्यादा मसालेदार, और ज्यादा तीखी और खट्टी चीजों का परहेज करें। ये गुस्से को और बढ़ाती हैं। चाय,शराब के सेवन से दूर रहें।ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं।यदि आपको लगता है की किसी की बात आपको गुस्सा दिला रही है तो वहां से दूर हो जाये या फिर गहरी गहरी साँस ले और अपने ध्यान को किसी और विषय पर ले जाये। यह गुस्से को काबू करने का सबसे अच्छा तरीका है।

जब भी मनुष्य को तीव्र क्रोध आता है ,चाहे वह कितना भी समझदार क्यों न हो, उसकी बुद्धि उसका साथ नहीं दे पाती और वह कुछ ऐसा भी करने को आतुर हो जाता है,जो वह कभी सपने में भी नही सोच सकता हो।क्रोध सबसे भयंकर है। यह अच्छे से अच्छे व्यक्ति को भी राक्षस की तरह बना देता है। क्रोध में आकर मनुष्य की बुद्धि का विनाश हो जाता है।उसे यह भी नहीं ध्यान रहता कि वह क्या बोल रहा है? या फिर क्या कर रहा है? किसी की छोटी-सी गलती पर भी एकदम से करीबी रिश्ते भी टूट जाते है। कई बार तो गुस्से मे व्यक्ति ऐसा कर जाता है कि दूसरे ने गलती भी नहीं की होती बस गलतफहमी की वजह से शक हो जाता है और गुस्सा करके इंसान ऐसी-ऐसी बातें कह देता है जो वह सोचता भी न हो । इस प्रकार गुस्सा अच्छे से अच्छे रिश्तों में भी कड़वाहट पैदा कर देता है।कई बार गुस्सा किसी व्यक्ति पर आया होता है, लेकिन निकाल किसी चीज पर देते है। जैसे कि किसी व्यक्ति की phone पर ही किसी से किसी बात को लेकर लड़ाई हो गयी, तो फोन को ही दीवार मर ही पटक देंगे ।उसे दूसरे व्यक्ति का नुकसान न होकर ख़ुद का ही नुकसान होता हैं ।कुछ तो ऐसे भी होते है, जो भी हाथ में हो वही चीज तोड़ देंगे। मतलब नुक्सान तो उसने अपना ही किया। अपनी ही सम्पति का नुक्सान कर दिया। ये तो भौतिक वस्तुओं का नुकसान हुआ ।उससे भी बड़ा नुक्सान स्वास्थ्य का हैं जो हमारे शरीर को ख़राब करता हैं ।हमारे दिमाग की सोचने-समझने की शक्ति ख़त्म हो जाती है और शरीर में ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है, और दिमाग पर भी बोझ इतना अधिक हो जाता है कि हमारे शरीर की नाड़ियो पर विपरीत प्रभाव पड़ता है और इससे लकवा भी हो सकता हैं कुछ समय का क्रोध या यूं कहें कि कुछ क्षण का गुस्सा हमारी पूरी जिंदगी पर भी असर कर सकता हैं गुस्सा हमे किसी अन्य व्यक्ति के कारण आया, लेकिन उसका नुक्सान तो हमें ही झेलना पड़ा। क्रोध करने से दूसरे व्यक्ति का क्या चला गया? 

गुस्से से हमारी ही बुद्धि का नाश हुआ, रिश्तों में कड़वाहट पैदा हुई, हमने अपनी ही सम्पति को नष्ट किया और सबसे बड़ी बात कि हमने अपनी ही सेहत का नुक्सान किया। तो दोस्तों कभी भी गुस्से को अपने अंदर नहीं आने देना चाहिए क्योंकि यह बहुत ही नुकसानदायक है। कभी-कभी गुस्सा करना फायदा भी दे जाता है। अगर आपका गुस्सा आपके नियंत्रण में है और आप जानते है कि आप क्या बोल रहे है और जो भी शब्द आप गुस्से में भी बोल रहे है ,वह दिमाग पर नियंत्रण रखते हुए ही बोले जा रहे है तो इसका सबसे बड़ा फायदा दूसरों को समझाने के लिये किया जा सकता है।

उदाहरण के लिये मान लीजिए आपका कोई करीबी मित्र या सम्बंधी जिससे आप बहुत प्रेम करते है, और उसपर आप कभी गुस्सा हो ही नहीं सकते। लेकिन ऐसा मित्र या सम्बंधी किसी गलत संगत में या किसी गलत काम में पड़ जाता है और बार-बार प्रेम से समझाने पर भी वह न समझे तो गुस्सा करके समझाने का प्रयत्न करना चाहिए साथ मे उसे लगे आप बहुत गुस्से में है। गुस्सा करिये भी, लेकिन याद रखे आपका गुस्सा आपके नियंत्रण में ही हो। क्योंकि अगर आपका गुस्सा आपके नियंत्रण में है और आप भली-प्रकार से जानते है कि आप क्या बोल रहे है और जो बोलना चाहिए वही बोल रहे हो तो यह गुस्सा आपके दोस्त की जिंदगी बदल सकता है।तो दोस्तों यह गुस्सा करने का सबसे बड़ा benefit है कि गुस्से को नियंत्रण में रखकर हम किसी को सुधार भी सकते हों।

अगर आपको कोई बात पर गुस्सा आ भी गया, लेकिन उसी वक्त आपको एहसास हो गया कि आप जो बोल रहे है वह गलत है तो उस बात को उसी समय मज़ाक में टाल दीजिये।अगर कोई विवाहित है, मान लीजिए अगर उसे अपनी पत्नी पर किसी वजह से गुस्सा आ भी जाता है और गुस्से में अपशब्दो का प्रयोग करता है ,लेकिन उसी समय उसे अपनी गलती का एहसास हो जाए तो उस गुस्से को खत्म कीजिये और उस बात को मज़ाक में टाल दीजिये। समझो कि अगर गुस्सा करने के बाद पत्नी कहे कि मैं मायके जा रही हूँ। तो आप उसे इतना ही कहिये कि तुम मायके जाओ मैं भी अपने ससुराल जा रहा हूँ और बच्चों को उनके ननिहाल वालो से मिलाता हूँ ।ऐसा बोलते ही आपकी पत्नी का गुस्सा शांत हो जायेगा।ग़ुस्सा शांत होने के बाद आराम से बात को सुलझा लीजिये ।याद रखिये पति पत्नी का रिश्ता सबसे ज्यादा भरोसे वाला होने के साथ का जन्मों-जन्मों का होता है ।

सारांश मे भयंकर गुस्से में व्यक्ति सही या गलत सोचने की स्थिती में नही होता हैं।यदि आप अपनी बात में सही हैं तो गुस्सा करने की ज़रूरत नही हैं और अपनी बात में गलत है तो गुस्सा करने का हक नही 

लिखने मे गलती हो तो क्षमाप्राथी 🙏🙏

            जय सच्चिदानंद 🙏🙏
रंगबिरंगे विचार (मेरी कलमससे)

Facebook417Google

Advertisements

5 Comments Add yours

  1. गुस्से के क्षणों को बहुत ही अच्छे से व्यक्त किया गया है जो सही भी है।

    Liked by 1 person

    1. आपने पसंद किया ।धन्यवाद🙏🙏

      Liked by 1 person

    2. Thanks 🙏🙏एक क्षण का भी ग़ुस्सा कभी कभी भारी नुकसान पहुचॉ सकता है

      Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s